बुधवार, 30 अक्टूबर 2013


बड़े दिनों बाद आज हमें नींद आई..............
                       और ख़्वाब में आपको देखकर हम रह नहीं पाए |
हसरत जो बाकी थीं फना होनेकी.............
                       आपसे जागते हुए जो हम कह नहीं पाए |
शायद ख़्वाब में ही पूरी हो सके .....
                       ये सोचकर उस रात भी हम सो नहीं पाए..........

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