रविवार, 12 जनवरी 2014

क्यों लेट हो गई मेरी ट्रेन

क्यों लेट हो गई मेरी ट्रेन |
क्या मैं ही बस एक पापी हूँ ||

हर बार करा कर इंतज़ार |
क्या मुझको तू दिखलाता है ||
क्यों मुझ पर साध निशाना तू |
यूं मंद मंद मुस्काता है ||

क्यों लेट हो गई मेरी ट्रेन |
क्या मैं ही बस एक पापी हूँ ||

और गर तेरा है लक्ष्य यही |
तो अन्यायी क्यों बनता है ||
मुझ बेचारे के चक्कर में |
क्यों सबका सुख तू हरता  है ||

क्यों लेट हो गई मेरी ट्रेन |
क्या मैं ही बस एक पापी हूँ ||

मैं तो फिर भी हूँ खाली ही |
खाली हो कर मुस्काता हूँ ||
पर औरों को हैं काम कई |
क्यों उनको व्यर्थ थकाता है ||

क्यों लेट हो गई मेरी ट्रेन |
क्या मैं ही बस एक पापी हूँ ||

मुझको अब फर्क नहीं पड़ता |
ना आगे पड़ने पाएगा ||
पर पाप मेरे धोते धोते |
तू एक दिन पापी बन जाएगा ||

एक दिन पापी बन जाएगा......

3 टिप्‍पणियां:

Unknown ने कहा…

Nice poem..

Unknown ने कहा…

Ye to tumne pahle likhi thi jab hum sath me wahi rahte the.....

Shailesh ने कहा…
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