क्यों लेट हो गई मेरी ट्रेन |
क्या मैं ही बस एक पापी हूँ ||
हर बार करा कर इंतज़ार |
क्या मुझको तू दिखलाता है ||
क्यों मुझ पर साध निशाना तू |
यूं मंद मंद मुस्काता है ||
क्यों लेट हो गई मेरी ट्रेन |
क्या मैं ही बस एक पापी हूँ ||
और गर तेरा है लक्ष्य यही |
तो अन्यायी क्यों बनता है ||
मुझ बेचारे के चक्कर में |
क्यों सबका सुख तू हरता है ||
क्यों लेट हो गई मेरी ट्रेन |
क्या मैं ही बस एक पापी हूँ ||
मैं तो फिर भी हूँ खाली ही |
खाली हो कर मुस्काता हूँ ||
पर औरों को हैं काम कई |
क्यों उनको व्यर्थ थकाता है ||
क्यों लेट हो गई मेरी ट्रेन |
क्या मैं ही बस एक पापी हूँ ||
मुझको अब फर्क नहीं पड़ता |
ना आगे पड़ने पाएगा ||
पर पाप मेरे धोते धोते |
तू एक दिन पापी बन जाएगा ||
एक दिन पापी बन जाएगा......
क्या मैं ही बस एक पापी हूँ ||
हर बार करा कर इंतज़ार |
क्या मुझको तू दिखलाता है ||
क्यों मुझ पर साध निशाना तू |
यूं मंद मंद मुस्काता है ||
क्यों लेट हो गई मेरी ट्रेन |
क्या मैं ही बस एक पापी हूँ ||
और गर तेरा है लक्ष्य यही |
तो अन्यायी क्यों बनता है ||
मुझ बेचारे के चक्कर में |
क्यों सबका सुख तू हरता है ||
क्यों लेट हो गई मेरी ट्रेन |
क्या मैं ही बस एक पापी हूँ ||
मैं तो फिर भी हूँ खाली ही |
खाली हो कर मुस्काता हूँ ||
पर औरों को हैं काम कई |
क्यों उनको व्यर्थ थकाता है ||
क्यों लेट हो गई मेरी ट्रेन |
क्या मैं ही बस एक पापी हूँ ||
मुझको अब फर्क नहीं पड़ता |
ना आगे पड़ने पाएगा ||
पर पाप मेरे धोते धोते |
तू एक दिन पापी बन जाएगा ||
एक दिन पापी बन जाएगा......
3 टिप्पणियां:
Nice poem..
Ye to tumne pahle likhi thi jab hum sath me wahi rahte the.....
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