रविवार, 3 जुलाई 2016

पहली मुलाकात

सच कहूँ मुझे कुछ हुआ न था |
तुम सुन्दर हो यह पता न था ||
हाँ देखा था मैंने तुमको |
जो देखा सब अज्ञात रहा ||
कुछ प्रश्न उठे वह याद नहीं |
कुछ पूछे भी तुमसे शायद ||
तुम खुश थी मेरी बातों से |
पर किन पर यह मालूम न था ||

हाँ एक बात है याद मुझे |
ये आँखे जब टकराईं थी ||
कुछ तार छिड़े अंतर्मन में |
तुम दिल में मेरे आई थी ||
उन आँखों में गहराई थी |
सच्चाई थी चतुराई थी ||
हिरनी सी चंचल न थी वो |
स्थिरता मुझको भाई थी ||

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