अलमारी की वो पुरानी डायरी
कुछ किताबों में मोड़ कर रखी पर्चियां
टटोल रहा हूँ बार बार
इस फ़िराक में
की तुमसे जो उस रोज़
नज़र से कह दिया था
कहीं तो लिखा ही होगा
अलमारी की वो पुरानी डायरी
कुछ किताबों में मोड़ कर रखी पर्चियां
ऐसे न जाने
कितने ही लम्हे
पहले भी पिरोएं हैं
साथ में हमने
लिखा भी है उनको
पढता हूँ तो जैसे
सांस लेते हैं
हाँ सांसो पे
कुछ कहा था शायद
कागज़ में दफ़न
न सही
ज़िन्दा है
धड़कता है वो लम्हा
तेरे मेरे दरमियान
कुछ तेरे ज़हन में
कुछ मेरे ज़हन में
अलमारी की वो पुरानी डायरी
कुछ किताबों में मोड़ कर रखी पर्चियां
कुछ किताबों में मोड़ कर रखी पर्चियां
टटोल रहा हूँ बार बार
इस फ़िराक में
की तुमसे जो उस रोज़
नज़र से कह दिया था
कहीं तो लिखा ही होगा
अलमारी की वो पुरानी डायरी
कुछ किताबों में मोड़ कर रखी पर्चियां
ऐसे न जाने
कितने ही लम्हे
पहले भी पिरोएं हैं
साथ में हमने
लिखा भी है उनको
पढता हूँ तो जैसे
सांस लेते हैं
हाँ सांसो पे
कुछ कहा था शायद
कागज़ में दफ़न
न सही
ज़िन्दा है
धड़कता है वो लम्हा
तेरे मेरे दरमियान
कुछ तेरे ज़हन में
कुछ मेरे ज़हन में
अलमारी की वो पुरानी डायरी
कुछ किताबों में मोड़ कर रखी पर्चियां
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें