शुक्रवार, 30 नवंबर 2018

अंतर मंथन


कागज़ के पटल पर स्याही को
एक अमर मृत्यु सा खींच दिया |

बस प्रश्न यहाँ पर एक शेष
की आदि कहें या अंत हुआ |

है चक्र बड़ा, हैं चक्र कई
अनुगमन सतत एक ज्ञात हुआ |

जो रुका नहीं बहता ही रहा
मुक्ति से भी निर्वृत्त हुआ |

छण जिसमे प्रकृति और पुरुष
का विलय विखंडन एक हुआ |

स्पर्श मात्र से जिसके की
अविलम्ब द्वन्द का अंत हुआ |

ग्रंथों में है सब लिखा मगर
शब्दों से बस संकेत हुआ |

अभिव्यक्त नहीं अनुभूति मात्र
अंतर मंथन से व्यक्त हुआ |

3 टिप्‍पणियां:

Unknown ने कहा…

Very good

Unknown ने कहा…

अति सुंदर !!

बेनामी ने कहा…

अति उत्तम , सर
प्रत्येक शब्द में सारांश का भंडार छिपा है।