हॉस्टल के अँधेरे में, कुछ राष्ट्रभक्त जग जाते थे ||
नारे देते लालाजी के, saunders को कोसे जाते थे |
सन्नाटे में मर मिटने की, हुंकारें भरते जाते थे ||
अंग्रेजों भारत छोड़ो, भारत माँ की जयकार लगाते थे |
पड़ोस के पूर्व राष्ट्रपति के, परिवार को भी ले
आते थे ||
कुछ लोग थे ऐसे दीवाने जो मौन खड़े मुस्काते थे |
मौका मिलते ही सुर में बस मफलर हाथों में नाचते थे |
ओए होए ओए होए कहते थे बस, और फोन पे फिर जुट
जाते थे ||
चाय बेचने वाले भी, रेडी लेकर आ जाते थे |
जली भुनी बसिया मूंगफली, का भी व्यापार कराते थे ||
भिक्छुक गण, साईं बाबा के, नाम से काम चलाते थे |
ऐसी ऐसी चीज़े, उस बेला में बिकने लगती थी ||
जिनका की जिक्र, कभी मैंने, ख्वाबों में भी था, सुना नहीं ||
इस आदि काल की बेला में, शब्दों का भी निर्माण हुआ |
कुछ नवयुग के योगी जन्में, कुछ डानों का अवतार
हुआ |
चतुर्वेद के नए नए, अपभ्रंशो का भी, प्रचार हुआ ||
राज़ की चीखें, हॉस्टल के, हर कोने से ही आती थी |
टार्ज़न की आवाजें बरबस, हर दिल को, हाँ, दहलाती थी ||
गदहे की ढेंचू ढेंचू थी, सिग्नल वार्डन के आने का |
पिल्ले की रोने की वो धुन, हर दिल को ही
हर्षाती थी ||
अंग्रेजों से न बैर कोई, स्वामी से न याराना था |
बस मौका था चिल्लाने का, सागर की वाट लगाने का ||
जिक्र नहीं संभव जिनका, शब्द बंधन से हैं पार बड़े |
ऐसे विलक्षण प्रतियोगी उस रात निखर से आते थे ||
हर एक था दूजे पर भारी अगला उससे अत्याचारी |
विडम्बना देखिये .........
भारत में पहली बार कहीं,
देखा बिजली के आते ही |
खुश होने के बदले, अभियंता,
अत्यंत दुखी हो जाते हैं ||
मिथ्या मुकुर में सोच का न बिम्ब है मेरे |
जीते हुए देखा हैं मैंने अपनी आँखों से ||
12 टिप्पणियां:
Ha ha ek number bhaiya....... :-)
Bahut sahi...bhai hai tu mera...
Eagarly waiting part 3
bhaut sahi bahi....maza aa gaya....
bhaut sahi bahi....maza aa gaya....
Waw..
excellent...
Kya likhte ho..
Sab kuch aisa lag raha hai....jaise kal hee lee baat ho...well written....
Nicely put together.
धन्यवाद!
समर्थन दो बाकी
.......हम क्रांति लिख देंगे
Bahut badiya...........maaja aa gaya
Awesome!!
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