ये सच बड़ा झूठा होता है |
बड़ा होगा मगर,
"शायद", अकेला होता है ||
सुना है की आखिर में जीतता है यही |
पर किताबों से लगा,
जीतने वालों की ज़ुबाँ होता है ||
मैंने देखा है उन नज़ारों को |
सच जहाँ झूठ के सहारे से खड़ा होता है |
हाँ, इसका भी अपना मजा होता है ||
थक गए दुनिया को झूठा कहने वाले |
इबादत में भी सच अब कहाँ होता है ||
सच बिकता है अब दुकानों में |
सच दिखता है आसमानों में |
आंसुओं में भी सच अब नहीं मिलता ||
माँ की कोख में पलता सच है |
उम्र दर उम्र, बस झूठ जवां होता है ||
सच को ढांक के रखती है,
कोई चादर झूठी |
सच में सच बड़ा कड़वा होता है ||
3 टिप्पणियां:
सच मे जबर्दस्त
मान गए
क्या तारीफ़ करू भाई सहाब मनन खुश कर दिया।
Shandar bhiyya ji
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