शनिवार, 13 अक्टूबर 2018

झूठा सच

ये सच बड़ा झूठा होता है |  
बड़ा होगा मगर, 
"शायद", अकेला होता है || 

सुना है की आखिर में जीतता है यही | 
पर किताबों से लगा,
जीतने वालों की ज़ुबाँ होता है || 

मैंने देखा है उन नज़ारों को | 
सच जहाँ झूठ के सहारे से खड़ा होता है | 
हाँ, इसका भी अपना मजा होता है || 

थक गए दुनिया को झूठा कहने वाले | 
इबादत में भी सच अब कहाँ होता है || 

सच बिकता है अब दुकानों में | 
सच दिखता है आसमानों में | 
आंसुओं में भी सच अब नहीं मिलता ||

माँ की कोख में पलता सच है |
उम्र दर उम्र, बस झूठ जवां होता है || 

सच को ढांक के रखती है,
कोई चादर झूठी | 
सच में सच बड़ा कड़वा होता है || 

3 टिप्‍पणियां:

Unknown ने कहा…

सच मे जबर्दस्त
मान गए

Shailesh ने कहा…

क्या तारीफ़ करू भाई सहाब मनन खुश कर दिया।

Unknown ने कहा…

Shandar bhiyya ji