कागज़ के पटल पर स्याही को
एक अमर मृत्यु सा खींच दिया |
बस प्रश्न यहाँ पर एक शेष
की आदि कहें या अंत हुआ |
है चक्र बड़ा, हैं चक्र कई
अनुगमन सतत एक ज्ञात हुआ |
जो रुका नहीं बहता ही रहा
मुक्ति से भी निर्वृत्त हुआ |
छण जिसमे प्रकृति और पुरुष
का विलय विखंडन एक हुआ |
स्पर्श मात्र से जिसके की
अविलम्ब द्वन्द का अंत हुआ |
ग्रंथों में है सब लिखा मगर
शब्दों से बस संकेत हुआ |
अभिव्यक्त नहीं अनुभूति मात्र
अंतर मंथन से व्यक्त हुआ |
3 टिप्पणियां:
Very good
अति सुंदर !!
अति उत्तम , सर
प्रत्येक शब्द में सारांश का भंडार छिपा है।
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